रामायण : इतिहास से जुड़ा एक भूगोल

#MyPiece

इसमे कोई दो मत नही कि रामायण हमारा इतिहास है लेकिन आज समय आ गया है कि हम अब इस इतिहास से जुड़े भूगोल पर भी जरा ध्यान दें. राम ने आखिर अयोध्या से श्रीलंका तक पैदल सफर कैसे तय किया और भारत के नक्शे पर हम इसे कैसे देख सकते हैं. जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या से वनवास के लिए निकले तो इन्होंने त्रिवेणी (गंगा, यमुना और सरस्वती) को पार कर प्रयाग नगरी में प्रवेश किया जिसे आज इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है. उत्तर प्रदेश में ही चित्रकूट वो जगह है जहां भरत राम से मिलने पहुंचे थे और “भरत मिलाप मन्दिर” वो स्थल है जहां भरत ने राम से वापस लौटने का आग्रह किया था. यहां से आगे बढ़कर राम ने पंचवटी में आश्रम बनाया. दण्डकारण्य का रामायण में बार बार जिक्र आता है जहां उनका सामना कई राक्षसी ताकतों से हुआ था. भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवी सबसे लम्बी नदी और मध्य प्रदेश की जीवन-रेखा नर्मदा और भारतवर्ष की दूसरी सबसे लम्बी नदी, पूरे महाराष्ट्र को सींचने वाली गोदावरी – इन दोनों महान नदियों के बीच बसा जंगल था- दण्डकारण्य. नर्मदा नदी को ही उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की सीमा-रेखा होने का गौरव प्राप्त है. महाराष्ट्र के नासिक स्थित पंचवटी से ही सीता-हरण होता है और राम लक्ष्मण के साथ उनकी खोज में निकलते हैं. आंध्र प्रदेश के अनन्तपुर जिले में लिपाक्षी वो जगह है जहां घायल जटायु का राम से मिलन हुआ और जटायु के निधन के बाद श्रीराम ने उनका क्रिया-कर्म यहीं पे किया.

अब रामायण के सबसे महत्वपूर्ण पात्र हनुमान अपने आराध्य से मिलते हैं और जिक्र आता है किष्किंधा नगरी का. किष्किंधा तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित नगर था जो कर्नाटक के कोप्पल जिले में हम्पी के नजदीक है. हम्पी अपने आप में एक बहुत बड़ा नाम है और भारत के इतिहास का एक बहुत बड़ा और अति महत्वपूर्ण पन्ना है- इसका विस्तृत जिक्र बाद में. किष्किंधा और पंचवटी- ये सब विशाल दण्डकारण्य के ही अंदर आते थे जो उत्तर में विंध्य से लेकर दक्षिण के प्रायद्वीपों तक फैला हुआ था. रामेश्वरम से आप सब परिचित हैं ही.

इसे हमारा दुर्भाग्य कहें या सत्य से आंखे मूंद लेना कि भारत मे राम की जन्मभूमि अयोध्या और भारत-श्रीलंका के बीच वानर सेना द्वारा तैयार किया गया रामसेतु – दुर्भाग्यवश दोनों ही अदालतों, नेताओं और मीडिया के बीच बिना सिर-पैर की बहस का मुद्दा बने हुए हैं.

इसे पर्यटकों को आकर्षित करने का प्रयास कहिये या इतिहास के प्रति संजीदगी लेकिन श्रीलंका सरकार इस मामले में हमसे बहुत आगे है और उन्होंने रामायण से जुड़ी हर एक जगह को सहेज के रखने का पूरा प्रयत्न किया है. श्रीलंका के पांच वनस्पति उद्यानों में से एक- “Hakgala Botanical Garden” वो जगह है जो कभी अशोक वाटिका हुआ करता था. कोलम्बो और कटरागामा के बीच स्थित और प्रकृतिक सुंदरता का जीता-जागता प्रमाण हैं उसानगोडा जहां की मिट्टी आज भी काली है. जानकारों के अलग अलग अपुष्ट दावे हैं लेकिन लंका-दहन के बाद बचे हुए राख को इसका कारण माना जाता है. ये जगह अपने चारों तरफ घिरे जगहों से वातावरण और व्यवहार में बिल्कुल ही अलग है. तलाईमन्नार वो जगह है जहां राम-सेतु से उतरने के बाद राम ने श्रीलंका में अपना पहला कदम रखा था. आज वहां का समुद्र-तट और बीच आकर्षण के केंद्र हैं.

तो भाई कुल मिलाकर बात ये है कि इतिहास आपके सामने है और भूगोल तो मुँह बाये ही खड़ा है तब भी अगर आप अंधे-बहरे बन कर बैठे हुए हैं तो या तो आप वामपंथी हैं या आपका दिमाग खराब है. किसी-किसी case में दोनों बातें हो सकती है.

#HappyRamNavami

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